छौड़ादानों, 22 मार्च 2025:
छौड़ादानों अंचल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अंचल की खेसरा पंजी की मूल प्रति एक निजी व्यक्ति प्रमोद कुमार के कब्जे में पकड़ी गई। प्रमोद इस संवेदनशील सरकारी दस्तावेज की छायाप्रति बनाने की फिराक में था, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने समय रहते उसे धर दबोचा। इस सनसनीखेज मामले में प्रमोद के साथ-साथ राजस्व कर्मचारी कुमुद रंजन भी लपेटे में आ गए, जिन पर मूल प्रति को अनाधिकृत हाथों में सौंपने का आरोप है।

सूचना मिलते ही छोड़ादनो थाना में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और गिरफ्तारी कर ली गई। कुमुद रंजन की लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जांच शुरू हो चुकी है कि आखिर यह दस्तावेज निजी हाथों तक कैसे पहुंचा और इसका क्या दुरुपयोग होने वाला था।
स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में कोई ढील नहीं बरती जाएगी और सरकारी कागजातों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
खेसरा पंजी क्या है और क्यों है अहम
खेसरा पंजी अंचल कार्यालय में रखा जाने वाला भूमि अभिलेख है, जिसमें मौजा के हर खेसरा यानी प्लॉट नंबर से जुड़ी जानकारी दर्ज रहती है। जमीन के स्वामित्व, रकबा और प्रकृति से जुड़े विवादों में यह दस्तावेज अहम आधार बनता है। इसलिए इसकी मूल प्रति सरकारी अभिरक्षा में रहती है और इसे किसी निजी व्यक्ति को सौंपना नियमों के खिलाफ है। मूल अभिलेख में छेड़छाड़ या उसकी गलत प्रति बनने से सरकारी और निजी जमीन से जुड़े कई मामलों पर असर पड़ सकता है।
मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस यह पता लगाएगी कि दस्तावेज किस उद्देश्य से बाहर ले जाया गया और इसमें कोई और शामिल है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जाता है। सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए अंचल कार्यालयों में अभिलेखों को देखने और उनकी प्रति देने की तय प्रक्रिया है, जिसमें शुल्क जमा कर सत्यापित प्रति ली जाती है।
सरकारी कर्मचारी पर अनुशासनिक कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत होती है। निलंबन के बाद विभागीय जांच चलती है और उसके नतीजे के आधार पर आगे का फैसला लिया जाता है।
जमीन के रिकॉर्ड कैसे देखें
बिहार में आम लोग जमाबंदी, दाखिल-खारिज और भूमि से जुड़ी कई जानकारियां राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर ऑनलाइन देख सकते हैं, जिससे दस्तावेजों के लिए बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है। सरकारी जमीन से जुड़े एक अन्य मामले के बारे में पढ़ें: बैरिया सरकारी जमीन मामला।
